> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2015

Precious words


We don't need to say
Its all understood
Its all known
Matter of fact
But still you know
It gives pleasure
Satisfies desires
When you blow a kiss
And say three words
Precious ones
I love you!
(c) Hemant Kumar Dubey

Only love for you!
















You know how much I love you -
More than you love yourself
Irrespective of what you say or do
All the pains and sufferings
Inflicted directly or indirectly
I bear with a smile
And though sometimes I frown
Not a hair of doubt I have
About how deeply I love you
Because instead of duality
There is only unity
True in saying, feeling and deed
Only love for you indeed.

- Hemant Kumar Dubey (c)

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

Our God


Unified with bonds no one can see
Its all about fellings
You and I
No separate existence
Love is only our God
And in love we are One.

(c) Hemant Kumar Dubey

रविवार, 11 जनवरी 2015

Life

Life is like a fingerprint
So touch everyone with love
Putting your best imprint
Knowing that you are unique
Life cannot be duplicated
So love yourself and others too
Dream and bring to life
That which is dear to you
Life is gift of God
Live and enjoy from start
Believe in yourself truly
Don't waste it, be smart
Life has no pause button
So dance with music of nature
Travel and see far off lands
Live like king with adventure.
(C) Hemant Kumar Dubey

शनिवार, 13 सितंबर 2014

दास्ताँ

अपना दर्द किसे बताये हेमंत
जो भी सुनता है हंस देता है
जख्म किसी को दिखाए कैसे
वो तो नमक छिड़क देता है।
जिससे उम्मीद थी कुछ करेगा
बिना पलटे ही वो चल देता है
नेह लगा ले खुदा से प्यारे हेमंत
वही है जो सबको संबल देता है।
© हेमंत कुमार दुबे
www.hemantdubey.com
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रविवार, 13 जुलाई 2014

महाकाल


देवों के भी देव
आप महाकाल कहलाते
करो कल्याण प्रभो
हम नित शीश झुकाते

हेमंत करे प्रणाम देव
सुख शांति मिल जाये
सोमवार से रविवार सफल
हर दिन प्रसन्नता लाये

सावन में विशेष पूजन
नव-नव श्रृंगार बने
हर्षित-पुलकित हो मन
हर हर महादेव सुने

गूंजे उठे दशों दिशाएँ
चलो ऐसा जयघोष करें
बने विश्वगुरू भारत अपना
आओ ऐसा संकल्प करें।

(स) हेमंत कुमार दूबे
http://www.hemantdubey.com

निमंत्रण




तितली सी उड़ती हुई
मेरे उपवन में आना
कुछ पुष्प खिलाये हैं
तुम सौन्दर्य बढ़ा जाना

सुगन्धित हो जाएगा तन
तेरा मन चहक उठेगा
बसंत बहार आयेगी 'हेमंत'
तेरा जीवन निखर उठेगा।

(स) हेमंत कुमार दूबे

गुरुवार, 15 मई 2014

सहचरी

श्री जुबिन गर्ग जी के असमिया और हिन्दी गीतों से प्रेरित यह नूतन भाव काव्यांजलि, उन्हीं को सादर समर्पित...



तुम ही हो
सिर्फ तुम
जिधर भी देखता हूँ
जीवन में
संसार में
अपनी कल्पना में
पूजा में
अर्चना में
भावों की विवेचना में

तब से
जब से देखा है तुम्हें
सूदूर छोटे शहर के हरे मैदान में
विस्तृत नील गगन के नीचे
इठलाती तितली-सी
खिलखिलाती हुई
ईश्वर के उपवन की कली-सी
मैं भूल गया खुद को

वर्षों बाद भी
ढूंढ रहा अपना अस्तित्व
पर जिधर देखता हूँ
सिर्फ तुम नजर आती हो

बगीचे की बेंच पर
छत की मुरेड पर
गौरैयों की चहचहाहट में
नीम की फुनगी पर
कोयल की कूक में
बस से उतरती
मोटर गाड़ी चलाती
पैदल चलती
भीड़ से निकलती
बच्चों से गले मिलती
ममता के रूप में
छोटे बच्चे की हँसी में
चाकलेट की छिना झपटी में
रूठी मुनियाँ में
सारी दुनिया में
तुम ही नजर आती हो

तुम्हीं हो
सिर्फ तुम्हीं
मेरा प्रथम प्यार
मेरे जीवन का आधार
होठों का गीत
शब्दों की कहानी
मन की भावना
मधुर कल्पना
मेरी सहचरी
मेरी कविता
परिणीता |

(स) हेमंत कुमार दूबे

शुक्रवार, 9 मई 2014

तन-वीणा



यह वीणा जो बज रही है वर्षों से
झेल चुकी है कई वार 
छूट कर गिरी थी
मजबूत हाथों से
जिन्होंने कसम खाई थी 
कभी गिरने नहीं देने की

तार इतनी बार कसे जा चुके हैं
टूटना चाहते हैं कभी भी
पर तुम कुछ मत सोचो
सुन लो जो धुन बज रही है
और खो जाओ
इसके सुरीले संसार में
मिल जाएगा तुम्हें सुकून
और धन्य हो जायेगा
इसका बजना
सार्थक हो जाएगा
इसका क्षणभंगुर जीवन|

(स) हेमंत कुमार दूबे

गुरुवार, 20 मार्च 2014

सिर्फ प्यार जरूरी है



समय-समय की बात होती है,
कभी दिन कभी रात होती है
नज़ारा सब बदल जाता है
कभी धूप कभी छाँव होती है

शिशुपन, बचपन, किशोरपन
प्रौढपन देखते-देखते बीत जाता है
घड़ी की टिक-टिक चलती रहती है
बुढ़ापा आता है जिंदगी खाक होती है

जानते हैं सभी आये थे कहाँ से
भूले से पथ पर चलते रहते हैं
मंजिल का पता किसे मालूम नहीं
जानकार भी सभी अनजान रहते हैं

तेरा मेरा मिलना दो दिन का यहाँ
यह क़स्बा व सराय न तेरी न मेरी है
मिल कर गले कुछ पल जी ले 'हेमंत'
तकरार नहीं, जीवन में सिर्फ प्यार जरूरी है |

(स) हेमंत कुमार दूबे