कवितायें जो मैं लिखता हूँ / मेरे जीवन की हैं कहानी / जो देखा-सुना इस संसार में / तस्वीरें कुछ नई, कुछ पुरानी // आएँ पढ़ें मेरी जीवन गाथा / जिसमें मैं और मेरा प्यार / आत्म-शांति अनुभूति की बातें / बेताब पाने को आपका दुलार...//
रविवार, 16 मार्च 2014
शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013
तुम्हारा संकल्प
समुंदर में उठती गिरती
लहरों को पता नहीं
कितनी खूबसूरती से लिखा
तुमने रेत पर मेरा नाम
उन्हें तो आदत है
किनारों से टकराने की
मिटाने की
बहा ले जाने की
पर तुम्हारे बारे में
वे नहीं जानती
मैं जानता हूँ
क्योंकि
मैं देख रहा हूँ
तुम्हारा संकल्प
बार बार लिखना
उसी सुंदरता से
परवाह किये बिना
लहरों की
तुम लिखती रहोगी
तबतक जबतक
मैं जिद न करूँ
प्यार से
ठहरने की
क्योंकि मैं जानता हूँ
तुम्हें प्यार है
सिर्फ मुझसे
हद से ज्यादा|
(c) हेमंत कुमार दूबे
लहरों को पता नहीं
कितनी खूबसूरती से लिखा
तुमने रेत पर मेरा नाम
उन्हें तो आदत है
किनारों से टकराने की
मिटाने की
बहा ले जाने की
पर तुम्हारे बारे में
वे नहीं जानती
मैं जानता हूँ
क्योंकि
मैं देख रहा हूँ
तुम्हारा संकल्प
बार बार लिखना
उसी सुंदरता से
परवाह किये बिना
लहरों की
तुम लिखती रहोगी
तबतक जबतक
मैं जिद न करूँ
प्यार से
ठहरने की
क्योंकि मैं जानता हूँ
तुम्हें प्यार है
सिर्फ मुझसे
हद से ज्यादा|
(c) हेमंत कुमार दूबे
बुधवार, 4 दिसंबर 2013
शनिवार, 9 नवंबर 2013
शुभ-संकल्प
राम अवध आये तब जल उठे दीप
बज उठी शहनाई, तुरही, ढोल, नगारे
दूर हुआ अँधियारा जीवन में
ख़ुशी से झूम उठे नगरवासी सारे
जली जोत आतम की सबके भीतर
फैला ज्ञान, बही भक्ति की धारा
सुखी प्रजा, नहीं कहीं दुःख-क्लेश
चहुँ ओर गूँजा 'जय श्री राम' नारा
नेतृत्व तम से अब ग्रसित चमन में
देश-भक्ति की अविरल बहे धारा
राम-राज हो सुखी प्रजा जन
करें शुभ-संकल्प, 'हेमंत' पुकारा
कुशल नव-नेतृत्व हो देश का
चमक उठे भारत का भाग्य सितारा
राम करें, मिटे गरीबी, बढे अमीरी
उन्नति हो देश की, देखे जग सारा ।
(c) हेमंत कुमार दूबे
बुधवार, 30 अक्टूबर 2013
मेरी याद आये तो
ईश्वर को याद करो, दिन बदल जायेंगे
गिरते हुए दिल फिर से संभल जायेंगे
मेरी याद आये तो थोड़ा मुस्कुरा देना
फ़िजा में फिर से गुल खिल जायेंगे
फूलों को छू लेना जब चाहोगी मुझे छूना
पराग कण तुम्हारे हाथों से चिपक जायेंगे
मेरी खुशबू से महक उठेंगे हाथ तुम्हारे
मन वीणा के तार झंकृत हो जायेंगे
तितली को सिर्फ देखते ही रहना तुम
पकड़ने से पंख दोनों टूट जायेंगे
उड़ना उन्मुक्तता से मेरी आदत है
तेरे बंधन में नहीं बंध पायेंगे
देखना हो जब मुझको सुबह उठ लेना
बाग में गुनगुनाते भौंरे से मिल जायेंगे
भर लेना फेफड़ों में ताज़ी हवा
तुम्हारी साँसों में, धडकनों में बस जायेंगे |
(c) हेमंत कुमार दूबे
मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013
कलियुग में
नुक्ताचीनी ही जिनकी आदत है
जो औरों को दर्द देकर हँसते हैं
वे अपने दर्द से तप तडपते हैं
पड़ोसी की खुशी देखकर मरते हैं
कलियुग का यही प्रभाव है
झूठे ही सच को छुपाते हैं
नेता जनता को भरमाते हैं
कौवे हंस को मारते-भगाते हैं
ज्यों चाँद बादलों से निकलता है
रात के बाद सूरज चमकता है
देर भले हो जाए न्याय में
अंतत: सत्य विजयी होता है|
(c) हेमंत कुमार दूबे
बुधवार, 2 अक्टूबर 2013
मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013
सीख
लाड़-प्यार में जिसे दी मैंने आजादी
डाल दी उसने ही पैरों में लौह बेड़ी
छप्पन भोग खिलाकर जिसे बड़ा किया
दी उसने टूटे दांतों को रोटियाँ कड़ी-कड़ी
सच का पाठ पढ़ाया मैंने उसे सदा
उसकी सारी बातें रही झूठ में लिपटी
एड़ी-चोटी का जोर लगाकर मैंने उठाया
खींच ली उसने पैरों के नीचे की धरती
उम्र बढ़े उसकी रोज मांगता था प्रभु से
उसकी पूजा में थी मेरे मौत की विनती
खड़ा हुआ जब मैं भी बस की पंक्ति में
मुझको देख खुदा भी भूल गया गिनती |
© हेमंत कुमार दूबे
प्यार की दास्तां
मुद्दत बाद जो
उनसे मुलाक़ात हुई, नजरें पहली बार चार हुईं |
पलकों के
शामियाने तने रहे देर तक, बातें सिर्फ दो-चार हुईं ||
निहारते ही रह गए
एक दूजे को, नजरें फिर शर्म से झुक गईं |
सिमट आईं बिखरी
हुई खुशियाँ, आँखें प्यार की दास्तां कह गईं ||
(c) हेमंत कुमार दूबे
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