कवितायें जो मैं लिखता हूँ / मेरे जीवन की हैं कहानी / जो देखा-सुना इस संसार में / तस्वीरें कुछ नई, कुछ पुरानी // आएँ पढ़ें मेरी जीवन गाथा / जिसमें मैं और मेरा प्यार / आत्म-शांति अनुभूति की बातें / बेताब पाने को आपका दुलार...//
रविवार, 13 नवंबर 2016
आशा व विश्वास
मन को बहलाता रहता हूँ
कोई तो शब्द पहुंचेंगा
कभी तो जवाब मिलेगा
कोई तो रास्ता निकलेगा
कभी तो मुरझाया फूल खिलेगा
आशा की जीत होगी
दोनों तरफ शांति होगी
'अव्यक्त' बात व्यक्त होगी
प्रीत परिपक्व होगी।
© हेमंत कुमार दुबे 'अव्यक्त'
13.11.2014
शनिवार, 12 नवंबर 2016
सुनो तितली
हे तितली, तुम ईश्वर की सुंदर रचना
क्या तुम अपने सौंदर्य को जानती हो?
हाथ बढाकर क्यों नहीं पकड़ा तुम्हें
क्या तुम इसका कारण जानती हो?
तुम्हारी सुंदरता का मैं कायल हूँ
तुम्हारी चंचलता मन को मोहती है
नन्हें रंगबिरंगे पंखों का फड़फड़ाना
तुम्हारा उड़ना मुझे अच्छा लगता है
तुम्हारी उड़ान में महसूस करता हूँ
मानो मेरे पंख है और मैं उड़ रहा हूँ
फूलों को देख कर खुश हो जाता हूँ
उनमें भी खुद को ही तो देखता हूँ।
तितली, तुम मन को आंदोलित करती
तुम्हारे कारण ही धरती का श्रृंगार है
तुम्हारी स्वछंदता को नहीं बांधता क्योंकि
व्यक्त में अव्यक्त को तुमसे प्यार है।
© हेमंत कुमार दुबे 'अव्यक्त'
12.11.2016, नई दिल्ली
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016
Wheels
Always mesmerized me, then
When I was a child
Going to home town in planes
From the young Himalayan Hills
Long journey of half a week
And now when I have grown
Through the years gone
Life seems exactly the same
Mechanical like the wheel
Running monotonously
But mesmerizing to onlookers
And taking me to the place
Where every journey ends.
14.12.2015, New Delhi
सोमवार, 4 जनवरी 2016
The first stopover
The road to my destination was clear
The Sun was going down
And there I lay on the path
Tired but smiling
I had started on a journey
Which I believe will give
Unlimited fun
And the much needed happiness
For years to come, and this
My first stopover I looked over
Just a few more steps ahead.
- © Hemant Kumar Dubey 'Avyakt'
रविवार, 20 दिसंबर 2015
मेरा धर्म
मेरा तो धर्म इंसानियत यह अव्यक्त कहता है।
ब्रह्म की बात
शनिवार, 19 दिसंबर 2015
'अव्यक्त' का अनुरोध
मेरा पृष्ठ इस अव्यक्त को व्यक्त करने का एक माध्यम।
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अव्यक्त का संदेश
जो हर क्षण रहता है सबके दिलों में प्यार बनकर
उस अगम अज अगोचर का अव्यक्त नाम लिखा है
रास्ते पर किसी भी चलो धर्म का नाम लेकर
मंजिल एक सबकी ग्रंथों में अलग नाम लिखा है
मजहबी बंदों के नाम यही एक पैगाम लिखा है
हेमंत अनाम इस जहाँ में अव्यक्त नाम लिखा है।
गुरुवार, 12 नवंबर 2015
विरह वेदना
उठती है जो
मेरे कलेजे को
चीरती है जो
तिल-तिल तडपाती है
बता दो हेमंत
इस विरह की
संयम की परीक्षा में
क्या करूँ?
इस हूक से
जो उठती है
बार - बार सीने में
मैं क्या कहूँ?
12.11.2015

