> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : 2026

रविवार, 8 मार्च 2026

A Prayer for Peace

A Prayer for Peace A Prayer for Peace

🌿 A Prayer for Peace

May the fallen rest in light,
May their souls find calm tonight.

May the wounded heal with care,
May their hearts be free from despair.

May the weary find their song,
May the weak be lifted strong.

May the war-cry voices cease,
May the world awaken peace.

May compassion guide the way,
May love be the word we say.

May the wars quickly end
May humanity live and stand.

बुधवार, 4 मार्च 2026

रंगोत्सव की शुभकामनाएं

रंगोत्सव की शुभकामनाएं

रंगोत्सव की शुभकामनाएं


बरसाने में राधिका, खेले रंग अपार।
श्याम संग होली रचें, प्रेम सुधा रसधार॥
गोप संग श्याम खेले, बरसे प्रेम अपार।
होली बनि रसधारा, जग में फैले प्यार॥
रंग गुलाल उड़त गगन, हँसी गूँजे द्वार।
होली आई संग लिए, सुख-समृद्धि अपार॥
रंग मिलें जब संग में, मिटे मन का भेद।
होली लाए एकता, प्रेम बढ़े, मिटे खेद॥
तन रंगे मन रंगे, रंगे 'अव्यक्त' आत्मा साथ।
होली उत्सव बने, जीवन का परिपाठ॥
राम नाम रंग में रँगो, मिटे सभी संताप।
होली हो मंगलमय, नष्ट सभी परिताप॥
रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 🫟
सादर🌹🌹🙏

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

वरदान

वरदान

हर सुर गाए अनंत का नाम।
हर दिल में बसे गोपाल श्याम।।

शेष, महेश, सुर सब गुण गाएँ।
गोपिन संग छाछ पर नाच दिखाएँ।।

नारद, व्यास भी पार न पाएं।
प्रेम सुधा से जग को भिगोएं।।

'अव्यक्त' मांगे भक्ति का वर दान।
नटखट कान्हा में बसे मन प्रान।।
— अव्यक्त

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

वर दे, वर दे, वीणावादिनी

वर दे, वर दे, वीणावादिनी

लेखक: Hemant • तिथि: 23 जनवरी 2026

वर दे, वर दे, वीणा वादिनी,
ज्ञान-भक्ति से भर दे।
नव-प्रकाश जीवन में आए,
सकल सुमंगल कर दे।

सभी स्वस्थ, सुखी, प्रसन्न,
भक्ति-रस से भर दे।
हरि-नाम में प्रीत जगे,
हृदय सरस मधुर कर दे।

वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।


वाग्देवी, वाणी की रानी,
मधुर स्वर में नाद भर।
मूढ़ मन के तम को हर ले,
बुद्धि में उजियारा कर।

शब्द-शब्द में सत्य की रेखा,
अर्थ-दीप प्रज्वलित हो।
करुणा-धारा बहती रहे,
मन में शांति प्रतिष्ठित हो।

वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।


कर्म बने पूजा की धारा,
सेवा में आनंद मिले।
रोज़मर्रा के क्षुद्र क्षण भी,
धर्म-दीप से दीप्त खिलें।

संगत सच्ची, सद्गुरु-कृपा,
मार्ग सदा सुगम कर दे।
अहं मिटे, विनय जगे,
चित्त निरंतर निर्मल कर दे।

वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।


राग-रंग में रमे नाद ऐसा,
जो अंतर्यामी को छू ले।
ताल-लय में बँधे प्रार्थना,
जो हर पीर को धूल दे।

गृह-आँगन में मंगल-गान,
हँसी-खुशी के स्वर भर दे।
बाल-मन में जिज्ञासा जगे,
वृद्ध-हृदय को बल भर दे।

वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।


ध्यान-दीपक जले निरंतर,
श्वास-श्वास में नाम रहे।
नीर-क्षीर सा भेद मिटे,
सबमें एक ही राम रहे।

पाप-ताप सब दूर हों माता,
सत्कल्पनाएँ फल दें।
जीवन-वीणा के हर तार में,
प्रेम-प्रभा को पल दें।

वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।

© Hemant • “Veena Vadini” — एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना।

बुधवार, 21 जनवरी 2026

लसै ते फलै

लसै ते फलै

लसै ते फलै — कविता

कश्मीरी–हिंदी भावों का संगम
लसै ते फलै, विलसै उजास, जीवन बने सदा, सुख का प्रकाश। हर कदम पे खिले, उम्मीद के फूल, हर फल में मिले, दुआओं का मूल।