वर दे, वर दे, वीणावादिनी
वर दे, वर दे, वीणा वादिनी,
ज्ञान-भक्ति से भर दे।
नव-प्रकाश जीवन में आए,
सकल सुमंगल कर दे।
सभी स्वस्थ, सुखी, प्रसन्न,
भक्ति-रस से भर दे।
हरि-नाम में प्रीत जगे,
हृदय सरस मधुर कर दे।
वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।
वाग्देवी, वाणी की रानी,
मधुर स्वर में नाद भर।
मूढ़ मन के तम को हर ले,
बुद्धि में उजियारा कर।
शब्द-शब्द में सत्य की रेखा,
अर्थ-दीप प्रज्वलित हो।
करुणा-धारा बहती रहे,
मन में शांति प्रतिष्ठित हो।
वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।
कर्म बने पूजा की धारा,
सेवा में आनंद मिले।
रोज़मर्रा के क्षुद्र क्षण भी,
धर्म-दीप से दीप्त खिलें।
संगत सच्ची, सद्गुरु-कृपा,
मार्ग सदा सुगम कर दे।
अहं मिटे, विनय जगे,
चित्त निरंतर निर्मल कर दे।
वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।
राग-रंग में रमे नाद ऐसा,
जो अंतर्यामी को छू ले।
ताल-लय में बँधे प्रार्थना,
जो हर पीर को धूल दे।
गृह-आँगन में मंगल-गान,
हँसी-खुशी के स्वर भर दे।
बाल-मन में जिज्ञासा जगे,
वृद्ध-हृदय को बल भर दे।
वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।
ध्यान-दीपक जले निरंतर,
श्वास-श्वास में नाम रहे।
नीर-क्षीर सा भेद मिटे,
सबमें एक ही राम रहे।
पाप-ताप सब दूर हों माता,
सत्कल्पनाएँ फल दें।
जीवन-वीणा के हर तार में,
प्रेम-प्रभा को पल दें।
वर दे, वर दे, वीणावादिनी,
वर दे, वर दे, वीणावादिनी।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें