भक्ति ग़ज़ल
हर सुर गाए अनंत का नाम।
हर दिल में बसे गोपाल श्याम।।
शेष, महेश, सुर सब गुण गाएँ।
गोपिन संग छाछ पर नाच दिखाएँ।।
नारद, व्यास भी पार न पाएं।
प्रेम सुधा से जग को भिगोएं।।
'अव्यक्त' मांगे भक्ति का वर दान।
नटखट कान्हा में बसे मन प्रान।।
हर दिल में बसे गोपाल श्याम।।
शेष, महेश, सुर सब गुण गाएँ।
गोपिन संग छाछ पर नाच दिखाएँ।।
नारद, व्यास भी पार न पाएं।
प्रेम सुधा से जग को भिगोएं।।
'अव्यक्त' मांगे भक्ति का वर दान।
नटखट कान्हा में बसे मन प्रान।।
— अव्यक्त

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें