> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : बंधू

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सोमवार, 26 सितंबर 2011

मेरे प्रभु!


मेरी हर एक साँस तुम्हारी है,
जैसे हैं हवा, पानी और जमीन,
सुबह की धूप, खुशबू तुम्हारी है
तुमसे ही परिपूर्ण है मेरा जीवन |


तुम तो करते कुछ भी नहीं
सब होता स्वत: कर्मों का परिणाम,
फिर भी सह लेते हर आक्षेप
माता-पिता, बंधू-सखा हो तुम |

मेरे प्रभु, तुम-सा कोई नहीं,
पीछे, अभी, आगे भी नहीं ,
जीवन-प्राण आधार मेरे तुम,
तुममे मुझमें कुछ भेद नहीं  !

(c) हेमंत कुमार दुबे