> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : रश्मि-प्रभा

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

रश्मि-प्रभा


सुमित्रा जी की नूरानी निगाहों से
बरसती अविरल अमृत की धारा से
सिंचित कोमल मन की
शशि किरणों सी रश्मि निहाल हुई
आशीष सदा निज ईश कृपा
ब्लॉग जगत में दिनकर प्रभा
अक्षर-अक्षर दिखतीं सर्वत्र |

--- प्रसिद्ध  कवयित्री रश्मि प्रभा दीदी को सादर समर्पित |  

12 टिप्‍पणियां:

  1. खुशियों के शब्द नहीं होते
    पर होता है चेहरे पर टंगा
    एक प्राकृतिक कैनवस
    जिसमें खुशियों के अदभुत
    मचलते रंग दिख जाते हैं
    जो छुपते नहीं
    और कहते हैं - शुक्रिया

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  2. rashmi di hai hi aise shabdo ke layak...bas hamare pass sabd hain nahi...par sach me bahut pyare shabdo me racha hai aapne rashmi di ko:)

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  3. बहुत ही सुन्दर, कोमल एवं भावमयी शब्दांजलि उनके लिये जो सर्वथा इसके लिये उपयुक्त हैं ! आपके स्वर में दो स्वर हमारे भी जुड़े हैं ! वाह !

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  4. शब्दों से अभिव्यक्त किया
    उस रश्मि को
    जो अपनी आभा से
    फैला देती हैं
    हर जगह उजास
    मन में
    जग जाती है आस
    जीवन में भी
    आता है विश्वास

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  5. आदरणीया रश्मि जी, साधना जी, संगीता जी और माननीय मुकेश जी
    आपका हार्दिक आभार |
    सादर,
    हेमंत

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  6. waaah didi par koi kuchh likhta hai to nbahut achha lagta hai.....Hemant ji badhayi aapne samay rahte ...achha kam kiya hai aur hame raah bhi dikhayi hai.

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  7. didi ke liye to sahi me jitna bhi kaha jaye wo kam hi hai ..didi to hamesha saki prerna rahi hai ...bahut hi achha hemant ji !!!

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  8. jaha Rashmiji hoti hai..kavita khud apna sthan dhundh le ke baith jati hai...Rashmiji meri prerna hai ..mera sab kuch hai..vaise mai gujarati lekhika hu..par kabhi kabhi jab Rashmiji se bat karti hu aisa hota hai gujarati likhna bandh karke hindi jagat me aa jau..kittttttttttna kuch likhna hai unke liye..unka aavaj kitna komal hai fir bhi dar lagta hai ki kisi bat pe bas vo naraj na ho jaye ruth na jaye mujse..isliye bahut kam bat karti hu..jabki man me roj lalach rahti hai ki unka aavaj sunne ko mil jaye to kitna achcha....unki kavitaye padhti thi jab shuruaat me to gujarati hone ke karan muje aisa hota tha ki muje kuch samj hi nahi aa rha..par ab unko padh padh ke jaise har bat samaj aati hai...puri book bhar jayegi unke liye likhungi to ...to aaj ke liye itna hi..vapas kuch likhungi.....AUR EK BAT KAH DU RASHMIJI KE HRADAY ME KHUD KE LIYE STHAN HAI VO SOCH KE HI MUJE BAHUT KHUSHI ILTI HAI..agar yaha bhi hindi barobar nahi likha to mafi mangti hu..par bas sikh rahi hu...

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  9. ब्लॉग जगत में दिनकर प्रभा
    अक्षर-अक्षर दिखतीं सर्वत्र |

    भावनाएं प्रकट करने का ये अंदाज भी प्यारा है ..
    रश्मि जी तो है ही तारीफ़ के काबिल :)

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  10. हेमंत जी, आपने रश्मि दी के लिए जो यह पंक्तियां लिखी हैं यह एक बहुत बड़ी सच्‍चाई है .. यूं ही आप किसी पर लिखने चलो तो एक शब्‍द भी नहीं लिख सकते और आपने तो बहुत ही बेहतरीन पंक्तियां लिखी हैं रश्मि दी पर इनकी स्‍नेहिल छवि का हर कोई कायल है, इनके लिये जितना भी कहा जाये वो कम है ...इन पंक्तियों के साथ रश्मि दी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं इनकी यह छवि यूं हीं हमेशा कायम रहे ...

    कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.
    सदियों रहा है दुश्मन दौरे-जमां हमारा ।

    और आपको इन शब्‍दों के लिये विशेष रूप से बधाई ... बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ...।
    आशीष सदा निज ईश कृपा
    ब्लॉग जगत में दिनकर प्रभा
    अक्षर-अक्षर दिखतीं सर्वत्र |

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