> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : माँ, तेरी याद आती है

रविवार, 15 जनवरी 2012

माँ, तेरी याद आती है


दिन के उजालों में,
रात के अंधेरों में,
सुबह की धूप में,
दोपहर की तपिस में,
शाम के धुंधलके में,
दीपक की लौ में,
रसोई में बनते हुए,
हलवे की सुगंध में,
माँ, तेरी याद आती है|

अँधेरे से जब डरता हूँ,
कहीं लड़खड़ा कर गिरता हूँ,
उठता हूँ, संभालता हूँ,
तेरा ही नाम लेता हूँ,
माँ, तेरी याद आती है |

चाँद को देखता हूँ -
लगता है तेरा प्यार,
छन-छन कर,
पेड़ों के पत्तों बीच से,
मुझ पर बरसता है,
आह्लादित करता है,
माँ, तेरी याद आती है|

चिड़िया को देखता हूँ,
चोंच में दाना लिए,
घोसले पर बैठ कर,
ची-ची करते बच्चों संग,
माँ, तेरी याद आती है|

पार्क की बेंच पर,
देखता हूँ बैठे हुए,
जब किसी को बुनते,
रंग-बिरंगे स्वेटर,
माँ, तेरी याद आती है|

जीवन की आपा-धापी,
अब रास नहीं आती है,
पर पेट तो पालना है,
बच्चों को जिलाना है,
कर्तव्यों को निभाना है,
शहर की भीड़-भाड़ में,
खो गया हूँ पर,
माँ, तेरी याद आती है|

जानता हूँ गांव का जीवन -
शांत, सुखी, अच्छा है,
हरियाली है, खुशहाली है,
आ नहीं सकता काट कर,
अभी अपने शहरी बंधन,
मुझे मुक्त करने आजा,
माँ, तेरी याद आती है|

(c) हेमंत कुमार दुबे

7 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर , पावन भाव .....

    माँ जीवन कितना रची बसी होती है ...... सच में

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  2. गहरे भाव लिए।
    मां पर बेहतरीन रचना।
    सच में मां का स्‍थान कोई नहीं ले सकता।

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  3. dil ko chuu lene wali ye kavita hai kaisi....aankhon ko naam kar dene wali ye kavita hai kaisi.Haar kisi k jeewan se juudi ,kuch ankaahi ,kuch aan suuni si pokaar ho jaise(Maa teri yaad aati hai).

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  4. प्रिय सत्यम जी, विश्वजीत जी, इन्द्र जी,अतुल जी और डॉक्टर मोनिका शर्मा जी,

    इस कविता को मेरी बहन ने माँ को पढ़ कर सुनाया, माँ की ऑंखें नम हो गयीं और कुछ दिनों के बाद ही माँ मेरे पास दिल्ली आ गयी |

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  5. आप सबके प्रोत्साहन और टिप्पणियों के लिए धन्यवाद.

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