> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : फ़रवरी 2026

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

वरदान

वरदान

भक्ति ग़ज़ल

हर सुर गाए अनंत का नाम।
हर दिल में बसे गोपाल श्याम।।

शेष, महेश, सुर सब गुण गाएँ।
गोपिन संग छाछ पर नाच दिखाएँ।।

नारद, व्यास भी पार न पाएं।
प्रेम सुधा से जग को भिगोएं।।

'अव्यक्त' मांगे भक्ति का वर दान।
नटखट कान्हा में बसे मन प्रान।।
— अव्यक्त