> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : मेरे प्रभु!

सोमवार, 26 सितंबर 2011

मेरे प्रभु!


मेरी हर एक साँस तुम्हारी है,
जैसे हैं हवा, पानी और जमीन,
सुबह की धूप, खुशबू तुम्हारी है
तुमसे ही परिपूर्ण है मेरा जीवन |


तुम तो करते कुछ भी नहीं
सब होता स्वत: कर्मों का परिणाम,
फिर भी सह लेते हर आक्षेप
माता-पिता, बंधू-सखा हो तुम |

मेरे प्रभु, तुम-सा कोई नहीं,
पीछे, अभी, आगे भी नहीं ,
जीवन-प्राण आधार मेरे तुम,
तुममे मुझमें कुछ भेद नहीं  !

(c) हेमंत कुमार दुबे

2 टिप्‍पणियां:

  1. तुम तो करते कुछ भी नहीं
    सब होता स्वत: कर्मों का परिणाम,
    फिर भी सह लेते हर आक्षेप
    माता-पिता, बंधू-सखा हो तुम |
    prabhu yah dayaa banaye rakhna

    उत्तर देंहटाएं
  2. जियो ,जियो ..... बहोत अच्छे... !

    उत्तर देंहटाएं