> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : जब तुमसे बात नहीं होती

गुरुवार, 9 मई 2013

जब तुमसे बात नहीं होती

 

जब तुमसे बात नहीं होती

चांदनी रात नहीं होती

घने बादल होते हैं नभ पर

बोलते उल्लू शाखों पर

अमावस सा घुप अँधेरा होता

कुछ भी सुझाई नहीं देता

 

जब तुमसे बात नहीं होती

तारों की सौगात नहीं होती

बिजली कडकती है

वज्र-सा आघात करती है

डरा हुआ मन मरता है

तन काँपता और तडपता है

 

जब तुमसे बात नहीं होती

जज्बातों की औकात नहीं होती

साँसे उखड़ती जाती हैं

धड़कने थमने लगती हैं

दिल से चीत्कार निकलती है

दम घुटने लगता है |

 

(c) हेमंत कुमार दुबे

 

1 टिप्पणी:

  1. "जब तुमसे बात नहीं होती

    साँसे उखड़ती जाती हैं

    धड़कने थमने लगती हैं"

    कुछ कुछ होता है.....

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