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शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

हिन्दी, तुम ही तुम नजर आओगी




हिन्दी, तुम कौन हो
कई नौजवान कहते हैं
वही जो गुलामी की बेड़ियों में जकडे
अंग्रेजी की भी टांग तोड़ते है
भारत नाम भूल
इंडिया इंडिया कहते हैं

परेशान मत होना
स्वर्णिम युग का आगाज हो चुका है
इन्टरनेट पर तुम्हारा अवतार हो चुका है
भारत के माथे की तुम बिंदी
भारत का श्रृंगार
अब तो मोबाइल पर भी विराजती हो
फिर कैसा डर

भारत के लोक-लाडले संत
तुम्हें ही मान देते हैं
शिष्य उनके
अब पूरी दुनिया में फैले हैं
जान लो
दूर नहीं वो दिन
भारत विश्व में पूजा जायेगा
और तब मन्त्रों में
शब्दों में
कीर्तनों में
चहुंओर
हिन्दी, तुम ही तुम नजर आओगी |

(c) हेमंत कुमार दूबे
हिन्दी दिवस पर यह विशेष कविता आपको कैसी लगी जरूर बताएं |

3 टिप्‍पणियां:

  1. दूर नहीं वो दिन
    भारत विश्व में पूजा जायेगा
    और तब मन्त्रों में
    शब्दों में
    कीर्तनों में
    चहुंओर
    हिन्दी, तुम ही तुम नजर आओगी |

    ऐसा ही हो..... मान बना रहे हमारी हिंदी का....सुंदर कविता

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  2. 'bharat ke tum mathe ki bindi bharat ka shrigar,chhun aur hindi tum hi tum nazar aaogi"sunder bhaw liye behad khoobsurat rachna.

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