> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : ऐलान

मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

ऐलान



नट जैसे रूप और नाम बदलता
पर बदलती नहीं असली पहचान
एक ईश्वर इस जग का मालिक
उसी की रचना यह सारा जहान

यदि तुम मेरे मत से सहमत
कर दो जग में यह ऐलान
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
सब एक ही सत्ता की संतान


© हेमंत कुमार दूबे

2 टिप्‍पणियां:

  1. उस ईश्वर की सत्ता को कौन भुला सकता है ...
    सच कहा है आपने ...

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  2. आपके ब्लॉग को ब्लॉग - चिठ्ठा में शामिल किया गया है, एक बार अवश्य पधारें। सादर …. आभार।।

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