> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : एक प्रार्थना - माँ के लिए

शनिवार, 19 नवंबर 2011

एक प्रार्थना - माँ के लिए


उनकी सांसों से बनी धडकन मेरी,
तन में बिजली सी दौड़ गयी,
खून से उनके प्यास मेरी बुझती रही,
रुधिर तन में  सुधा बन गयी |

निवाला उनका मैंने भी खाया
स्वाद, सेहत से भरपूर ,
कुर्बानियों से पला-बढ़ा उनकी
करती रहीं जो उन्हें, हरपल मजबूर|

उनके करम से ही हुआ मजबूत मैं,
कैसे चुकाऊं क़र्ज़ - उनके दूध का,
हे विधाता! हर एक सांस मेरी ले लो,
पर सजा-संवार दो बुढ़ापा उनका|

हे मालिक,  संसार के नियामक!
ग़मों का साया रहे सदा उनसे दूर,
कटे सुख से जीवन की शाम,
माँ को  खुशियाँ मिलें भरपूर|


(c) हेमंत कुमार दुबे

2 टिप्‍पणियां:

  1. हे मालिक, संसार के नियामक!
    ग़मों का साया रहे सदा उनसे दूर,
    कटे सुख से जीवन की शाम,
    माँ को खुशियाँ मिलें भरपूर|... maa ke liye dua ... maa ka aashish hamesha saath rahe

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  2. बहुत ही खूबसूरत लिखा है !!!

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