> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : पूनम का चाँद

बुधवार, 15 जून 2011

पूनम का चाँद


आज पूनम की रात,
आकाश की ओर
उठती हैं नजरें,
ढूँढती हैं चारो तरफ,
चाँद आसमान में |

शशि का प्रकाश
दिखता क्यों नहीं,
पूछता है छोटा बच्चा
देश का लघु नागरिक|

चाँद को लगा है ग्रहण
कह दूँ तो
वह नहीं समझेगा
उसी तरह जैसे
झुग्गीवाला नहीं समझेगा |

एक पैकेट नमकीन
एक बोतल शराब
और ५०० का नोट
उसके वोट की शक्ति
ग्रहित कर देते हैं |

शशि के जैसे ही
भारत को ढक लिया है
फिर कुटिल राजनेताओं ने
प्रकाश की किरण का
थोडा इंतज़ार करो |

--- हेमंत कुमार दुबे

1 टिप्पणी:

  1. चाँद को लगा है ग्रहण
    कह दूँ तो
    वह नहीं समझेगा
    उसी तरह जैसे
    झुग्गीवाला नहीं समझेगा |...bahut hi achhi abhivyakti

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