> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक

सोमवार, 4 जनवरी 2016

The first stopover

The road to my destination was clear
The Sun was going down
And there I lay on the path
Tired but smiling
I had started on a journey
Which I believe will give
Unlimited fun
And the much needed happiness
For years to come,  and this
My first stopover I looked over
Just a few more steps ahead.

- © Hemant Kumar Dubey 'Avyakt'

रविवार, 20 दिसंबर 2015

मेरा धर्म

बुतों को पूजना चाहो तो भले पूजो मेरे भाई
मेरा तो धर्म इंसानियत यह अव्यक्त कहता है।
© हेमंत कुमार दुबे 'अव्यक्त'
इन पंक्तियों के साथ ही मैंने अव्यक्त उपनाम चुना है आगे की कविताओं के लिए लिये।

ब्रह्म की बात

ब्रह्मज्ञानी का शिष्य हूँ,
ब्रह्म में रमण करता हूँ,
ब्राह्मण कहलाता हूँ
मैं ब्रह्म का अनन्य अंश हूँ
अव्यक्त नाम मेरा
न कोई वैरी मेरा
न कोई मित्र मेरा
न ये चोला मेरा
चहुँओर व्याप्त ब्रह्म है
उसके नाटक का अंश है
भ्रम का पर्दा हटाना है
यही ब्रह्म का आदेश है |

- हेमंत कुमार दुबे 'अव्यक्त'

शनिवार, 19 दिसंबर 2015

'अव्यक्त' का अनुरोध

मेरा पृष्ठ इस अव्यक्त को व्यक्त करने का एक माध्यम।
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अव्यक्त का संदेश

सतगुरू बापू से जो सिखा वही संदेश लिखा है
चलता संसार एक मालिक से जिसका नाम लिखा है
जो हर क्षण रहता है सबके दिलों में प्यार बनकर
उस अगम अज अगोचर का अव्यक्त नाम लिखा है
रास्ते पर किसी भी चलो धर्म का नाम लेकर
मंजिल एक सबकी ग्रंथों में अलग नाम लिखा है
मजहबी बंदों के नाम यही एक पैगाम लिखा है
हेमंत अनाम इस जहाँ में अव्यक्त नाम लिखा है।
© हेमंत कुमार दुबे 'अव्यक्त'

गुरुवार, 12 नवंबर 2015

विरह वेदना

तुम से बिछड़ कर
उठती है जो
मेरे कलेजे को
चीरती है जो
तिल-तिल तडपाती है 
बता दो हेमंत
इस विरह की
संयम की परीक्षा में
क्या करूँ?
इस हूक से
जो उठती है
बार - बार सीने में
मैं क्या कहूँ?
© हेमंत कुमार दुबे
12.11.2015

बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

सम्मान

माँ से सीखी हमने हिन्दी जो अपनी पहली बोली
बात करते इसमें ही जुटती जब मित्रों की टोली
हंसी ठहाका करते हिंदी में और करते ठिठोली
अब अंग्रेजी क्यों अपनाते बोलो मेरे  हमजोली
हिंदी का योगदान आजादी में क्या तुम्हें है पता
सेनानियों की भाषा हिन्दी थी क्या तुम्हें है पता
हिंदी ने जोड़ा देश को तभी भारत ये कहलाता
जानो हिन्दी में लिखने पढ़ने से सम्मान नहीं घटता।

© हेमंत कुमार दुबे

शनिवार, 12 सितंबर 2015

ख्वाहिश

अगर लिख सकते हो
तो कोई पैगाम लिख दो
जिन्दगी के कुछ पल
मेरे नाम लिख दो
जब लूँ सांस आखिर
तुम मेरे सामने रहो
इक तेरा इक खुदा
जुबान पर नाम हो...

(स) हेमंत कुमार दुबे
12.09.2015

मंगलवार, 26 मई 2015

প্ৰশ্ন (Question)

প্ৰশ্ন
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মোৰ মৰম, তুমি আজি বৰকে মনত পৰি আছা

আৰো মই বৰ অকলশৰিয়া অনুভৱ কৰি আছো

আগতে মই কান্দাতে তেমি মোক চুপ কৰাইছিলা

আজি তুমি মোৰ কাষতে কত আতৰি গলা ?

(c) হেমন্ত কুমাৰ দুবে

Translation in English:

Question
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My love, you are being thought of a lot today
And I am feeling totally alone
When I cried last time you consoled me
Today leaving my side where have you gone ?

(c) Hemant Kumar Dubey

रविवार, 8 मार्च 2015

नारी

जन्म, पालन, पोषण और सुरक्षा देती नारी
मां, बहन, पत्नी और बेटी रूप में रहती नारी
दुनिया के सारे नर सुन लो एक बात हमारी
तुम नहीं  होते इस जग में अगर न होती नारी।

(स) हेमंत कुमार दुबे