> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : October 2015

बुधवार, 14 अक्तूबर 2015

सम्मान

माँ से सीखी हमने हिन्दी जो अपनी पहली बोली
बात करते इसमें ही जुटती जब मित्रों की टोली
हंसी ठहाका करते हिंदी में और करते ठिठोली
अब अंग्रेजी क्यों अपनाते बोलो मेरे  हमजोली
हिंदी का योगदान आजादी में क्या तुम्हें है पता
सेनानियों की भाषा हिन्दी थी क्या तुम्हें है पता
हिंदी ने जोड़ा देश को तभी भारत ये कहलाता
जानो हिन्दी में लिखने पढ़ने से सम्मान नहीं घटता।

© हेमंत कुमार दुबे