> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : August 2013

शनिवार, 31 अगस्त 2013

The divine knowledge



It doesn't matter who loves or who hates
Guruji has opened divine knowledge's gate
In lovers and haters see no difference
Because from God everything comes

He is the creator and the destroyer 
The hungry and the hunger too
The bread, its provider and the eater
And He is wish, the wisher and its filler too.

(c) Hemant Kumar Dubey

The beautiful goal



The valley of wild flower is enchanting
And the surrounding forests are deep
There are promises that I have to keep
The climb the hills however they be steep

I have rested a while
I have charted a new way
A way to help people
And be happy and gay

Help the people reach the top
Help the needy without stop
To seek the Supreme is my goal
I am one with Him, no separate soul

Beloved, you are my integral part
The journey together we have to start
Hand in hand we have to walk and run
Life will be enjoyment and fun.

© Hemant Kumar Dubey


सोमवार, 26 अगस्त 2013

उसकी आदत



तिरछी नजर से जो उसने मुझे देखा
मैं सुध-बुध भूला बैठा
पलकें झुकाकर जब वो मुस्कुराई
मैं सारा जीवन लुटा बैठा

एक पल की खुशी की खातिर
हाय, मैंने यह क्या किया
मेरे चाहने वाले तो और भी थे
सबको दर्द दिया, रुसवा किया

मैं मिट गया उसके लिए
चेहरे पर उसके शिकन नहीं है
बड़ी देर से समझ आया
छलना ही उसकी आदत है |

(c) हेमंत कुमार दूबे

रविवार, 18 अगस्त 2013

प्रेम वर्षा


इस सावन की आखिरी बारिश
कभी खिलखिलाती
कभी ठहाके लगाती
भिगो रही थी
दो बदनों को

एक छाते के नीचे
आधे सूखे, आधे गीले
अल्हड मस्ती से टहलते
पानी के पतले रेलों पर
पैरों से छप-छप करते
सूनी सड़क पर तलाशते बचपन

कभी फैला कर बाँहों को
समेट लेने को मानो आतुर
बीते वर्षों के बिखरे मोती
बरस रहे जो अम्बर नैनों से

अद्वैत भाव से भरे हुए
प्रीतम वर्षों बाद मिले थे
प्रेम वर्षा को करते आत्मसात
एक-एक पल जी रहे थे

एक छाते के नीचे दोनों
फिर भी पूरे भीग रहे थे
रिमझिम-रिमझिम बूंदों से
तन भर मन भर |


© हेमंत कुमार दूबे 

शनिवार, 17 अगस्त 2013

नवजीवन दे जाओ



जब घबरा जाता हूँ जिंदगी से
तंग आ जाता हूँ लोगों की बेरुखी से
करता हूँ याद तुम्हें तहे-दिल से
जानते हुए कि अभी तुम्हें प्यार नहीं मुझसे

तुम बेवफा नहीं, मजबूर हो
उस ईश्वर की खूबसूरत कला हो
सबको प्यार देती हो
पर तभी जब उनका समय हो

समझते नहीं लोग तुम्हारे प्रेम को
तुम्हारे अनमोल उपहार को
क्योंकि वे देख नहीं सकते भविष्य को
अपना जो लेती हो पूरी तरह उनको

तुम मेरे पास आओ
मुझको अपना बनाओ
मेरी रूह को सुकून पहुँचाओ
फिर से नवजीवन दे जाओ

अपनों की दुनिया में बेगाना हूँ
ईश्वर का चहेता और दीवाना हूँ
हर जन्म में तुमसे मिलता आया हूँ
मृत्यु देवी, तुम्हारे लिए नया नहीं पुराना हूँ |



© हेमंत कुमार दूबे

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

स्वतंत्रता – दिवस





स्वतंत्रता दिवस जिस दिन मनाते हैं,
लक्ष्मी बाई झाँसी की रानी,
मंगल पांडे, बहादुर शाह ज़फर,
वीरों की याद आती कहानी |

तात्या, नाना, बिरसा, आज़ाद,
जैसे वीर अंग्रेजों से लड़े थे,
गाँधी, नेहरू, लाल-बाल-पाल,
स्वतंत्रता पथ के पुजारी अड़े थे |

नौरोजी, गोखले, पटेल, शास्त्री,
अंग्रेजों के सम्मुख डटकर खड़े थे  
सरोजिनी, महादेवी, मैथिलि, दिनकर भी
अपने स्वर और कलम ले भिडे थे |

राजगुरू, सुखदेव, भगत सिंह,
जैसे जांबाज अमर शहीदों की,
याद आती है परम कुर्बानी
बिस्मिल, खुदीराम, सुभाष की |

बलिदान हुए असंख्य वीर,
स्वतंत्रता सस्ती नहीं मिली,
लता से वीरों की गाथाएँ सुन
होता रोमांचित तन, आंखे गीली |

देशभक्ति हिलोरें मारती मन में,
स्वतंत्रता दिवस जब मानते हैं ,
संकल्प देश की स्वतंत्रता-रक्षा का
१५ अगस्त को फिर दुहरा लेते हैं |


(c) हेमंत कुमार दूबे