> काव्य-धारा (Poetry Stream): जीवन, प्यार और आत्मा-झलक : August 2012

सोमवार, 27 अगस्त 2012

कवि

 
 
 
 
शब्द को पकड़ने के लिए,
मानो गर्म रेत पर चलता है,
भावों को मूर्त बनाने हेतू,
मृग की तरह भटकता है |

तृष्णा जितनी तीव्र होती है,
उतना ही निखरता है कवि,
मृग-मरीचिका सहता है,
नभ में तपते रहते रवि |

बन देश-समाज का कर्णधार,
शब्दों के संग खेलता है,
मिटाता दिलों की दूरियां,
अलख जगाता जाता है |

जब सबकी जेब भरती है,
कवि का दिल भरता है,
माया कैसी निराली है,
कवियों का बटुआ खाली है |

(c) हेमंत कुमार दूबे

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मंगलवार, 21 अगस्त 2012

Van Mahotsav - Plantation Mega-Festival



Lets plant a tree,
A small sapling,

Be it the mango,
The bitter leaved Neem,

Or the Carribean Trumpet tree,
Lovingly called the Basant Rani.


Van Mahotsava started in 1950
And now it is just 62 years young,

In this year 2012,

As young as it was in the 1970s.

Celebrate the Plantation Mega-Festival,
And remember the contribution,

The trees have made and still making,
In our lives everyday, in every way.


Protect the trees,
Our true friends,

And water them daily,
To ensure life on earth,

For generations to remember,
Our love and care for them.


Trees are true life givers,
Making earth habitable,

Our lives comfortable,
By their every act,

Their every organ,
Be that the root,

The stem, the leaves,
Or their fruits.


We are indebted,
And indebted we will be,

For the debt of the trees
Cannot be fully paid,

So lets celebrate,
The festival of trees,

The Van Mahotsav grand,
And make our small contribution,

Towards a green revolution.


(c) Hemant Kumar Dubey

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

विजय कुमार, इंडिया




तुम्हारे हाथ जब उठते थे,
ताने हुए पिस्तौल को,
धड़कन मेरी रुक जाती,
पाँच गोलियाँ ठका-ठक,
फिर नेपथ्य से आवाज,
“विजय कुमार, इंडिया”|
रजत पदक जीत कर,
देश का गौरव बने,
विजय पताका फहराकर,
सबका मान बढ़ाया,
तुम्हें सलाम करूँ,
या दूँ धन्यवाद,
या फिर दुआयें,
जो चाहो सब तुम्हारा है|
(c) हेमंत कुमार दुबे

=> श्री विजय कुमार जी को लंदन ओलंपिक २०१२ में २५ मीटर रेपिड फायर पिस्टल शूटिंग में रजत पदक जितने पर  हार्दिक बधाई व शुभकामना !